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1239 नए आरक्षियों के लिए कार्यशाला आयोजित, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता पर दिया गया जोर

गोरखपुर जनपद पुलिस में शामिल हुए बारह सौ उन्तालीस महिला एवं पुरुष आरक्षियों के लिए बाबा गम्भीर नाथ प्रेक्षागृह में एक व्यापक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में नवआरक्षियों को पुलिस सेवा के मूल सिद्धांतों, व्यवहारिक चुनौतियों और उनकी जिम्मेदारियों से अवगत कराया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य उन्हें एक सक्षम, सजग और संवेदनशील पुलिसकर्मी के रूप में तैयार करना रहा।

कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ, पुलिस अधीक्षक नॉर्थ ज्ञानेंद्र, पुलिस अधीक्षक सिटी निमिष पाटिल, सहायक पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार एस तथा सहायक पुलिस अधीक्षक दिनेश गोदारा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने अपने संबोधन में पुलिस सेवा के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए आरक्षियों को कर्तव्यनिष्ठा के साथ कार्य करने की प्रेरणा दी।

एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने अपने संबोधन में कहा कि पुलिस की वर्दी अधिकार नहीं बल्कि जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास ही पुलिस की सबसे बड़ी पूंजी है, जिसे बनाए रखना हर पुलिसकर्मी का दायित्व है।

 उन्होंने आरक्षियों को संवेदनशीलता, धैर्य और निष्पक्षता के साथ कार्य करने पर बल दिया। एसपी नॉर्थ ज्ञानेंद्र ने पुलिस संगठन की मजबूती में हर आरक्षी की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जैसे मजबूत ईंट से मजबूत दीवार बनती है, उसी तरह हर आरक्षी पुलिस व्यवस्था की नींव को सुदृढ़ करता है।

 उन्होंने बीट क्षेत्र की गहन जानकारी रखने और स्थानीय समस्याओं को समझने पर जोर दिया।

एसपी सिटी निमिष पाटिल ने पुलिसिंग के व्यावहारिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए कहा कि छोटी घटनाएं भी बड़ी समस्या बन सकती हैं, इसलिए मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी की सूझबूझ और निर्णय क्षमता बेहद अहम होती है।

सहायक पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार एस ने फील्ड में आने वाली चुनौतियों का जिक्र करते हुए आरक्षियों को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत रहने की सलाह दी, जबकि सहायक पुलिस अधीक्षक दिनेश गोदारा ने कानून की सही जानकारी को प्रभावी पुलिसिंग की आधारशिला बताया।

कार्यशाला के दौरान कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, बीट पुलिसिंग, आपातकालीन प्रतिक्रिया, साइबर अपराधों की रोकथाम तथा तकनीकी संसाधनों के उपयोग जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई।

 अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पुलिस की सकारात्मक छवि बनाने और जनता का विश्वास मजबूत करने में नए आरक्षियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि पुलिस सेवा केवल नौकरी नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम है।

 कार्यशाला का समापन इस विश्वास के साथ हुआ कि सभी नए आरक्षी अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ करेंगे।