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कैशलेस इलाज एवं चिकित्सा प्रतिपूर्ति व्यवस्था को सरल बनाने हेतु मुख्यमंत्री को दिया ज्ञापन

गोरखपुर राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद का एक प्रतिनिड मंडल गोरखनाथ मंदिर में जाकर मंदिर के सचिव द्वारका तिवारी को माननीय मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन दिया। परिषद कर्मचारी एवं पेंशनरों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को देखते हुए कर्मचारियों ने माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार से दीनदयाल उपाध्याय कैशलेस इलाज योजना को और अधिक सरल, प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाने की मांग की है।परिषद के अध्यक्ष रूपेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में कई व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे इलाज कराने में भारी परेशानी हो रही है।

कर्मचारियों ने मांग की है कि एनपीएस व्यवस्था में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को भी चिकित्सा प्रतिपूर्ति एवं कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान की जाए। साथ ही कैशलेस चिकित्सा योजना में ओपीडी, जांच एवं संपूर्ण इलाज को शामिल किया जाए।

महामंत्री मदन मुरारी शुक्ल ने बताया कि शासन स्तर से अस्पतालों को समय से भुगतान न होने के कारण कई अस्पताल कैशलेस इलाज करने से मना कर रहे हैं, जिससे मरीजों को आर्थिक एवं मानसिक परेशानी उठानी पड़ रही है। इसके अतिरिक्त बीमारी निर्धारित होने तथा संबंधित संस्थान से भर्ती अनुमोदन मिलने तक इलाज प्रारंभ न होने से गंभीर मरीजों की स्थिति और अधिक कठिन हो जाती है। कर्मचारियों ने मांग की है कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे मरीज का इलाज तत्काल प्रारंभ हो सके।

उन्होंने गंभीर बीमारियों में निर्धारित पांच लाख रुपये की सीमा को बढ़ाकर संपूर्ण इलाज का खर्च सरकार द्वारा वहन किए जाने की भी मांग की है।

वरिष्ठ उपाध्यक्ष पंडित श्याम नारायण शुक्ला एवं अनिल द्विवेदी ने बताया कि कर्मचारियों एवं पेंशनरों ने चिकित्सा प्रतिपूर्ति भुगतान में हो रहे अत्यधिक विलंब पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि कार्यालयों में बिल महीनों तक लंबित रखे जाते हैं, मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में परीक्षण एवं सत्यापन में अत्यधिक समय लगता है तथा बजट एवं भुगतान प्रक्रिया में भी अनावश्यक देरी होती है। इस कारण कर्मचारियों और पेंशनरों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है।

कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री जी से मांग की है कि चिकित्सा प्रतिपूर्ति के निस्तारण हेतु एक निश्चित समयावधि निर्धारित की जाए ताकि कर्मचारियों एवं पेंशनरों को समय से भुगतान प्राप्त हो सके और उन्हें अनावश्यक परेशानियों से मुक्ति मिल सके।