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लाइव आप तक न्यूज़ से सम्पादक की ख़ास ख़बर
जनपद बस्ती में पुलिस लाइन सभागार में यूनिसेफ एवं दिशा संस्था के सहयोग से महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा को संस्थागत मजबूती देने की दिशा में “बहू–बेटी सम्मेलन” पर एकदिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला का आयोजन
बस्ती महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध अपराध एवं लिंग आधारित हिंसा की रोकथाम के उद्देश्य से गोरखपुर जोन में संचालित मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत “बहू–बेटी सम्मेलन” पहल के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु दिनांक 01 जून 2026 को जनपद बस्ती में एक एकदिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई । कार्यशाला का आयोजन अपरान्ह 12:00 बजे से सायं 4:30 बजे तक जनपद बस्ती में पुलिस लाइन सभागार में किया गया । इस कार्यक्रम का संचालन सुश्री शालिनी सिंह, प्रभारी, महिला थाना ने किया ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री संजीव त्यागी, पुलिस उप महानिरीक्षक, बस्ती परिक्षेत्र रहे । जबकि डॉ0 यशवीर सिंह, पुलिस अधीक्षक, बस्ती तथा श्री श्यामकांत, अपर पुलिस अधीक्षक बस्ती, विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे । कार्यक्रम में जनपद बस्ती के समस्त पुलिस सर्किलों से पुलिस उपाधीक्षक, सभी पुलिस थानों से मिशन शक्ति केंद्र प्रभारी एवं प्रत्येक मिशन शक्ति केंद्र से दो महिला पुलिस कार्मिकों सहित विभिन्न विभागों के जनपद स्तरीय अधिकारी, यूनिसेफ के प्रतिनिधि तथा दिशा संस्था की टीम ने सक्रिय रूप से प्रतिभाग किया ।
कार्यशाला का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इसके उपरांत सभी अतिथियों को लाइव प्लांट भेंट कर स्वागत किया गया। तत्पश्चात श्री शैलेश प्रताप सिंह, मण्डलीय बाल संरक्षण सलाहकार, यूनिसेफ द्वारा कार्यशाला के उद्देश्य एवं उसकी रूपरेखा पर विस्तृत परिचय प्रस्तुत किया गया ।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि संजीव त्यागी ने कहा कि परिक्षेत्र के समस्त जनपदों के सभी पुलिस थानों द्वारा मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत निरंतर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस महानिदेशक, गोरखपुर जोन की प्रेरणा से प्रारंभ की गई इस पहल में सहयोग हेतु यूनिसेफ एवं दिशा संस्था का आभार व्यक्त किया तथा कार्यशाला के सफल आयोजन में उनके योगदान की सराहना की। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान समय में किशोरियों के घर से भागने के मामलों में वृद्धि हो रही है, जो अत्यंत गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि मिशन शक्ति केंद्रों के माध्यम से किशोरियों एवं किशोरों को इस विषय पर व्यापक रूप से जागरूक किया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं, विशेषकर किशोरियों, को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य किया जाना आवश्यक है, क्योंकि आर्थिक रूप से सशक्त महिलाएं अपने प्रति होने वाली हिंसा का विरोध करने और सम्मानपूर्वक जीवन यापन करने में अधिक सक्षम होती हैं। उन्होंने समाज में ऐसा वातावरण विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया, जिसमें लड़कियां अपने विवाह से संबंधित निर्णय स्वयं ले सकें तथा उन पर बिना सहमति के विवाह का दबाव न बनाया जाए। उन्होंने कहा कि कई बार बिना सहमति के किए गए विवाह बाद में वैवाहिक विवादों, मानसिक तनाव एवं गंभीर अपराधों का कारण बन जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अभिभावकों एवं बड़े लोगों को बच्चों पर अपने निर्णय नहीं थोपने चाहिए तथा महिलाओं को संपत्ति अधिकार सहित अन्य अधिकार प्रदान करने के पीछे भी सरकार की यही सोच है कि महिलाएं आत्मनिर्भर एवं निर्णय लेने में सक्षम बन सकें। महिला सशक्तिकरण पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि समाज में कई बार इसकी अवधारणा को सही रूप में नहीं समझा जाता। महिला सशक्तिकरण का अर्थ पुरुषों के विरोध या उनसे संघर्ष करना नहीं है, बल्कि महिलाओं को अधिकार, सुरक्षा, सम्मान एवं समान अवसर प्रदान करना है। साथ ही उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि महिलाएं सशक्त होने के बाद अपने परिवार एवं समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने मिशन शक्ति केंद्र की टीम को निर्देशित किया कि वे सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी महिलाओं तक पहुंचाएं तथा उन्हें योजनाओं का लाभ दिलाने में सहयोग करें। पुलिस विभाग की भूमिका पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों को यह नहीं कहना चाहिए कि वे “महिला हितैषी” कार्यवाही कर रहे हैं, बल्कि उन्हें अपने कार्य में पेशेवर, निष्पक्ष एवं तटस्थ रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसी दृष्टिकोण से पुलिस की विश्वसनीयता बढ़ेगी। उन्होंने विशेष रूप से वैवाहिक विवादों के मामलों में अनावश्यक दबाव न बनाने तथा तथ्यों एवं मेरिट के आधार पर कार्यवाही करने की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे वास्तविक समाधान संभव हो सके और विवाद पुनः उत्पन्न न हों।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉ. यशवीर सिंह ने कहा कि अपर पुलिस महानिदेशक, गोरखपुर जोन के विज़न के अनुरूप जनपद बस्ती में बहू-बेटी सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से भविष्य में समाज में लिंग भेदभाव को कम करने की दिशा में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल सकता है। उन्होंने पुलिस विभाग में हाल ही में भर्ती हुई महिला आरक्षियों को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि वे दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचकर पीड़ित महिलाओं को सहयोग प्रदान करें तथा उन्हें उनके अधिकारों एवं सुरक्षा संबंधी विषयों पर जागरूक करें। उन्होंने कहा कि कई बार अपराध के आंकड़ों में वृद्धि का अर्थ यह नहीं होता कि अपराध बढ़ गए हैं, बल्कि यह भी संभव है कि पहले अपराधों की रिपोर्टिंग नहीं हो रही थी और अब लोग आगे आकर शिकायत दर्ज करा रहे हैं। इसलिए अपराध के आंकड़ों का विश्लेषण संवेदनशीलता एवं वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा महिलाओं एवं नागरिकों के हित में अनेक लाभकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनके लिए विभिन्न पोर्टल्स भी विकसित किए गए हैं। साथ ही भारतीय न्याय संहिता में कई विशेष प्रावधान लागू किए गए हैं, जिनसे सकारात्मक सुधार देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि अपेक्षित परिणाम प्राप्त करने के लिए अन्य विभागों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने यूनिसेफ के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहायता मिल रही है। पुलिस विभाग के कर्मियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पहले की तुलना में अब पुलिस विभाग में संसाधन एवं सुविधाएं बेहतर हुई हैं, इसलिए अब यह नहीं कहा जा सकता कि संख्या बल या संसाधनों की कमी के कारण प्रभावी कार्य नहीं हो पा रहा है। वर्तमान परिस्थितियों में पुलिस कर्मियों से अधिक संवेदनशील, प्रभावी एवं उत्तरदायी पुलिसिंग की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने मिशन शक्ति केंद्र की महिला पुलिस कर्मियों से कहा कि वे व्यक्तिगत रुचि लेकर पीड़ित महिलाओं तक अपना सहयोग पहुंचाएं तथा उन्हें उचित मार्गदर्शन प्रदान करें। उन्होंने कहा कि एक महिला पुलिस कर्मी होने के नाते उनकी जिम्मेदारी और भी अधिक बढ़ जाती है तथा उनसे समाज की अपेक्षाएं भी अधिक होती हैं। इसलिए उन्हें अपने कर्तव्य एवं नैतिक दायित्व का निर्वहन करते हुए पीड़िताओं का सहयोग करना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस कार्यशाला के पश्चात बहू-बेटी सम्मेलन के अंतर्गत व्यापक एवं प्रभावी जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से महिलाओं एवं बालिकाओं के विरुद्ध अपराध तथा लिंग आधारित हिंसा के मामलों में कमी लाई जा सकेगी तथा अपर पुलिस महानिदेशक, गोरखपुर जोन एवं पुलिस मुख्यालय की अपेक्षाओं को पूर्ण किया जा सकेगा।
सुश्री पल्लवी राय, राज्य सलाहकार, यूनिसेफ ने “आँकड़े क्या बताते हैं” (Data Speaks) विषय पर चर्चा करते हुए आयु, जाति, वर्ग, शिक्षा आदि जनसांख्यिकीय संकेतकों के आधार पर महिलाओं के विरुद्ध हिंसा की प्रवृत्तियों एवं उसके संभावित कारणों पर प्रकाश डाला । श्री शैलेश प्रताप सिंह, मण्डलीय बाल संरक्षण सलाहकार, यूनिसेफ ने अपने सत्र में बहू-बेटी सम्मेलन की उत्पत्ति, अवधारणा, उद्देश्य तथा “क्यों, क्या, कैसे और कौन” के आयामों पर चर्चा की। उन्होंने इसकी कार्यप्रणाली, सामुदायिक मॉडल, Cascaded Rollout, लिंग आधारित हिंसा पर चर्चा समूह, डेटा आधारित हस्तक्षेप, मिशन शक्ति केंद्र की भूमिका, विभागीय कन्वर्जेन्स, माइक्रो प्लान, क्षमता निर्माण, प्रभावी पर्यवेक्षण, जेंडर-रेस्पॉन्सिव पुलिसिंग तथा जवाबदेही जैसे प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला। सुश्री पल्लवी राय ने, जेंडर विशेषज्ञ ने जेंडर के सामाजिक निर्माण, पितृसत्ता, जेंडर आधारित हिंसा, विक्टिम ब्लेमिंग, इंटरसेक्शनैलिटी तथा पुरुषों और लड़कों की जिम्मेदारी जैसे प्रमुख विषयों पर चर्चा की। श्री महर्षि अग्निहोत्री, राज्य सलाहकार, यूनिसेफ ने महिला एवं बाल संरक्षण संबंधी प्रमुख कानूनों, यौन अपराधों में हुए महत्वपूर्ण संशोधनों तथा न्यायालयों के प्रमुख निर्णयों पर चर्चा की और मिशन शक्ति केंद्र की प्रथम संपर्क बिंदु के रूप में भूमिका पर प्रकाश डाला । उन्होंने गैर सरकारी संगठनो, चिकित्सा विशेषज्ञों, काउंसलर्स तथा मीडिया के साथ प्रभावी समन्वय की आवश्यकता पर जोर देते हुए सकारात्मक कहानियों के प्रसार के महत्व को रेखांकित किया।







