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सायरन बजा गोरखपुर क्लब पर हुआ हवाई हमला, वार्डेनों नें किया रेस्क्यू मॉकड्रिल के साथ 24 मई से प्रारम्भ हुए 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का समापन...

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सायरन बजा गोरखपुर क्लब पर हुआ हवाई हमला, वार्डेनों नें किया रेस्क्यू मॉकड्रिल के साथ 24 मई से प्रारम्भ हुए 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का समापन

 गोरखपुर मारवाड़ी सेवा समिति एवं गोरखपुर क्लब के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित प्रतिभा प्रशिक्षण शिविर में नागरिक सुरक्षा प्रखण्ड कोतवाली द्वारा उपनियंत्रक सत्य प्रकाश सिंह एवं चीफ वार्डेन डॉ. संजीव गुलाटी के निर्देशन एवं वरिष्ठ सहायक उपनियंत्रक वेद प्रकाश यादव के मार्गदर्शन में डिवीजनल वार्डेन कोतवाली विकास जालान के नेतृत्व में सीपीआर,फायर सेफ्टी एवं हवाई हमलों से बचाव का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण उपरांत हवाई हमले का मॉकड्रिल भी किया गया। सीपीआर के सम्बन्ध में जानकारी देते हुए मास्टर ट्रेनर /आईसीओ डॉ. मनोज कुमार मिश्रा नें बताया की सीपीआर अर्थात (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) एक आपातकालीन जीवन रक्षक प्रक्रिया है। यह तब दिया जाता है जब किसी व्यक्ति का दिल धड़कना बंद हो जाता है या उसकी सांस रुक जाती है (उदाहरण जैसे:- हार्ट अटैक या डूबने की स्थिति में)। इसका उद्देश्य मस्तिष्क और अन्य महत्वपूर्ण अंगों तक रक्त और ऑक्सीजन पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति अचानक बेहोश हो जाता है या सांस नहीं ले रहा है,तो तुरंत चिकित्सा सहायता (एंबुलेंस) को सुचना प्रदान कर बुलाएं और पीड़ित को समतल और कठोर जगह पर लिटा दें। अपने दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसा लें। अपने कंधों को बिल्कुल सीधा रखते हुए, पीड़ित की छाती के बीच में हथेली के निचले हिस्से से जोर से और तेजी से दबाएं। छाती को कम से कम दो इंच (लगभग पांच सेंटीमीटर) अंदर तक दबाए। इसे प्रति मिनट सौ से एक सौ बीस बार की गति से करें। यदि आपको सीपीआर की पूरी जानकारी है,तो हर तीस बार छाती दबाने के बाद पीड़ित का सिर थोड़ा पीछे करें, उसकी नाक बंद करें और अपने मुंह से उसके मुंह में दो बार धीरे-धीरे हवा (सांस) भी भरें। इसीक्रम में आग से बचाव के सम्बन्ध में बताते हुए स्टॉफ ऑफिसर वार्डेन सेवा साधना श्रीवास्तव नें कहाकि स्मोक अलार्म लगाएं। घर के हर तल पर और सोने के कमरों के बाहर स्मोक अलार्म अवश्य लगाएं। हर महीने इनकी जांच करें और समय पर बैटरी बदलें।अपने परिवार या कार्यस्थल के साथ आपात स्थिति में बाहर निकलने का रास्ता पहले से तय रखें। हर कमरे से बाहर निकलने के दो सुरक्षित मार्ग होने चाहिए। आग लगने पर कभी भी लिफ्ट का उपयोग न करें। पेट्रोल, पेंट, और गैस सिलेंडर जैसी ज्वलनशील चीजों को हमेशा धूप, आग और हीट से दूर सुरक्षित स्थान पर रखें। आग लगने पर फायर एक्सटिंग्विशर के उपयोग के संबंध में बताते हुए पोस्ट वार्डेन (आ.) मिलन अग्रवाल नें बताया कि ABC टाइप एक्सटिंग्विशर यह सबसे आम और बहुउद्देशीय एक्सटिंग्विशर है। इसका उपयोग लकड़ी, कागज, कपड़े, ज्वलनशील तरल पदार्थों (जैसे- पेट्रोल/पेंट) और बिजली के उपकरणों में लगी आग को बुझाने के लिए किया जाता है। CO2 टाइप एक्सटिंग्विशर यह बिजली के शॉर्ट-सर्किट और कंप्यूटर/इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की आग के लिए सबसे उत्तम है। Foamटाइप एक्सटिंग्विशर से पेट्रोल, डीजल और पेंट जैसे तरल पदार्थों से लगी आग को बुझाने के लिए उपयोग करते है। WATER टाइप एक्सटिंग्विशर जिनका उपयोग केवल ठोस पदार्थों कि आग बुझानें के लिए।K- टाइप एक्सटिंग्विशर का उपयोग रसोई में तेल और वसा से लगने वाली आग को बुझाने के लिए किया जाता हैं। प्रशिक्षण के उपरांत डिवीजनल वार्डेन कोतवाली विकास जालान के नेतृत्व में हवाई हमलों का मॉकड्रिल किया गया। जिसमें उन्होंने सायरन के संकेतों, सेलटर लेने कि विधि एवं बचाव के तरीकों को बताते हुए टीम के साथ प्रदर्शन के माध्यम से उपस्थित महिलाओं,पुरुषों एवं बच्चों को प्रशिक्षित किया। यह मॉकड्रिल पोस्ट वार्डेन प्रतीक सरकारी, आदित्य गुप्ता एवं डिप्टी पोस्ट वार्डेन जाहिद अली के नेतृत्व में डिवीजन द्वारा गठित कि गई बीस सदस्यों कि टीम द्वारा सम्पन्न कराया गया।