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राजघाट थाना प्रभारी गौरव वर्मा ने फहराया राष्ट्रध्वज; बोले— "यह खाकी केवल वर्दी नहीं, शहीदों के सपनों की अमानत हैं..

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आँखों में गर्व और हाथों में तिरंगा: राजघाट थाने पर भावुक कर देने वाले क्षणों के साथ मनाया गया 80वां स्वतंत्रता दिवस

राजघाट थाना प्रभारी गौरव वर्मा ने फहराया राष्ट्रध्वज; बोले— "यह खाकी केवल वर्दी नहीं, शहीदों के सपनों की अमानत हैं

​गोरखपुर थाना राजघाट देश की आजादी के 80वें पावन पर्व पर आज राजघाट थाने का प्रांगण केवल एक पुलिस स्टेशन नहीं, बल्कि देशभक्ति और भावनाओं का एक पवित्र धाम बना नजर आया। जब थाना परिसर में शान से फहराते तिरंगे पर सूर्य की किरणें पड़ीं, तो वहां मौजूद हर एक पुलिसकर्मी की आँखें गर्व से नम हो गईं और सीना चौड़ा हो गया। ​इस अत्यंत भावुक और गरिमामय समारोह का नेतृत्व थाना प्रभारी गौरव वर्मा ने किया। ​थाना प्रभारी गौरव वर्मा ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ तिरंगे की डोरी खींची। जैसे ही गगनचुंबी तिरंगा हवा में लहराया और फूलों की पंखुड़ियाँ बिखरीं, पूरा परिसर 'भारत माता की जय' और 'अमर शहीदों जिंदाबाद' के नारों से गूँज उठा। राष्ट्रगान की एक-एक धुन पर खाकी वर्दी में तैनात हर जवान ने अपनी मातृभूमि को नमन किया—यह दृश्य हर देखने वाले के रोंगटे खड़े कर देने वाला था। ​ध्वजारोहण के बाद जवानों को संबोधित करते हुए थाना प्रभारी गौरव वर्मा का गला अचानक भर आया। अपने भावुक और ओजस्वी भाषण में उन्होंने कहा आजादी का यह 80वां साल हमें उन गुमनाम शहीदों का अहसास कराता है, जिन्होंने हंसते-हंसते अपनी गर्दनें कटा दी थीं। खाकी पहनना कोई नौकरी नहीं है, यह एक साधना है। जब पूरा देश अपने परिवारों के साथ त्योहार मना रहा होता है, तब हम सड़कों पर पहरा दे रहे होते हैं। हमारा हर एक कतरा इस मिट्टी के नाम है। जनता की सुरक्षा ही शहीदों को हमारी सच्ची श्रद्धांजलि है। ​कार्यक्रम के दौरान जब थाना प्रभारी ने रात-दिन एक करके जनता की रक्षा करने वाले आरक्षियों और महिला पुलिसकर्मियों के समर्पण की तारीफ की, तो कई जवानों की आँखों में सजल नमी साफ देखी गई। उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मियों को गले लगाकर और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। ​पूरे थाने को तिरंगे रंग के फूलों और रोशनियों से ऐसे सजाया गया था जैसे कोई पवित्र मंदिर हो। कार्यक्रम के अंत में थाना प्रभारी ने स्वयं अपने हाथों से सभी पुलिसकर्मियों, मीडियाकर्मियों और आए हुए क्षेत्रवासियों का मुंह मीठा कराया। कानून के पहरेदारों के चेहरों पर झलकता यह अपनापन और देशप्रेम हर किसी के दिल को छू गया। ​इस ऐतिहासिक और भावुक कर देने वाले पल में थाने के समस्त उपनिरीक्षक, आरक्षी और स्थानीय नागरिक एक परिवार की तरह खड़े नजर आए