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PRKS महामंत्री विनोद राय ने NFIR को लिखा पत्र: 30 वर्षों से फ्रिज 300 दिनों की LEAVE ENCASHMENT सीमा समाप्त करने या 30 साल के औसत के आधार पर छुट्टी बढ़ाने की उठाई मांग
गोरखपुर पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ (PRKS) के महामंत्री एवं NFIR के ए.जी.एस. विनोद राय ने रेल कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति लाभों से जुड़े एक अत्यंत गंभीर और 30 साल पुराने मुद्दे को लेकर नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन (NFIR) के महामंत्री डॉ. एम. राघवैया को पत्र लिखा है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने भारत सरकार, रेल मंत्रालय और आगामी 8वें वेतन आयोग के समक्ष इस न्यायसंगत मांग को मजबूती से उठाने का आग्रह किया है।
महामंत्री विनोद राय ने पत्र में आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि केंद्र सरकार द्वारा सेवानिवृत्ति (Retirement) के समय मिलने वाले औसत वेतन छुट्टी (LAP) के नकदीकरण की सीमा में पूर्व में समय-समय पर बढ़ोतरी की गई थी:
वर्ष 1977 में पहली बार 150 दिनों की सीमा तय की गई थी।
चौथे वेतन आयोग में इसे बढ़ाकर 240 दिन किया गया।
पाँचवें वेतन आयोग (1997) में इसे 300 दिन कर दिया गया।
उन्होंने रेखांकित किया कि वर्ष 1997 के बाद से पिछले लगभग 30 वर्षों में छठा और सातवाँ वेतन आयोग बीत जाने के बावजूद 300 दिनों की इस अधिकतम सीमा में 1 दिन का भी इजाफा नहीं हुआ है।
विनोद राय ने मांग की है कि जिस प्रकार पिछले दशकों में वेतन आयोगों के अंतराल पर छुट्टियों की सीमा बढ़ाई जाती रही है, उसी 30 वर्षों के औसत के आधार पर सेवानिवृत्ति छुट्टियों की संख्या में आनुपातिक बढ़ोतरी की जाए, या फिर 300 दिनों की इस सीलिंग लिमिट को पूरी तरह समाप्त कर कर्मचारी के खाते में जमा समस्त अर्जित छुट्टियों का पूरा भुगतान किया जाए।
PRKS महामंत्री ने कहा कि रेल कर्मचारी 35 से 40 साल की अपनी पूरी नौकरी के दौरान दिन-रात, कठिन मौसम और त्योहारों में भी संरक्षा व रेल परिचालन को बनाए रखने के लिए अपनी छुट्टियाँ बचाकर रखते हैं। रिटायरमेंट के समय 300 दिनों के ऊपर की छुट्टियों को बिना किसी वित्तीय लाभ के रद्द कर देना कर्मचारियों के समर्पण के साथ सीधा अन्याय है।
महामंत्री ने एन.एफ.आई.आर. के माध्यम से मांग की है कि आने वाले 8वें केंद्रीय वेतन आयोग और भारत सरकार के सामने इस 30 साल पुरानी विसंगति को दूर करने के लिए दबाव बनाया जाए, ताकि सेवानिवृत्त हो रहे रेल कर्मचारियों को उनकी मेहनत का पूरा हक मिल सके।

