रेगुलर अपडेट और ताजी खबरों के लिए हमारे व्हाट्सएप ग्रुप यूट्यूब चैनल को ज्वाइन करे
https://www.aaptaknews.in/?m=1
https://whatsapp.com/channel/0029VayBqc0LikgHssxrmC2O
https://www.instagram.com/aaptaknews08?igsh=eW00NzhnYW1xOHc0
https://youtube.com/@aaptaknews-08?si=-GNoQ38LhY_MLAxf
लाइव आप तक न्यूज़ से सम्पादक की ख़ास ख़बर
जालसाजी के मुकदमे में दरोगा पर फर्जी गवाह बनाने का आरोप पांच लोगों ने शपथपत्र देकर जताई आपत्तिवादी श्याम नारायण तिवारी ने प्रेसवार्ता कर विवेचक पर लगाए गंभीर आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग
पट्टीदारों पर 8 एकड़ से अधिक पैतृक जमीन फर्जीवाड़े से अपने नाम जालसाजी के मुकदमे में दरोगा पर फर्जी गवाह बनाने का आरोप
पांच लोगों ने शपथपत्र देकर जताई आपत्तिवादी श्याम नारायण तिवारी ने प्रेसवार्ता कर विवेचक पर लगाए गंभीर आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग
पट्टीदारों पर 8 एकड़ से अधिक पैतृक जमीन फर्जीवाड़े से अपने नाम कराने का दावा, कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ था केस
गोरखपुर यामदेउरवा थाने में दर्ज जालसाजी और फ्रॉड के एक मुकदमे की विवेचना को लेकर वादी श्याम नारायण तिवारी ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गुरुवार को गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि मुकदमे के विवेचक उप-निरीक्षक (दरोगा) आलोक कुमार राय ने अभियुक्तों से मिलीभगत कर जांच को पूरी तरह प्रभावित किया। आरोप है कि विवेचक ने केस को कमजोर करने के लिए ऐसे पांच लोगों को सरकारी गवाह बना दिया, जिन्होंने कभी गवाही दी ही नहीं।वादी के मुताबिक, इन पांचों कथित गवाहों ने अब नोटरी शपथपत्र देकर स्पष्ट किया है कि उन्होंने मुकदमे में कोई बयान नहीं दिया है और विवेचना डायरी में दर्शाए गए हस्ताक्षर उनके नहीं हैं।
अंगूठा लगाने वाले के करा दिए हस्ताक्षर-
श्याम नारायण तिवारी ने बताया कि यह पूरा मामला मुकदमा संख्या 165/2026 की विवेचना से जुड़ा है। उन्होंने पुलिसिया कार्रवाई पर तंज कसते हुए कहा कि कथित गवाहों में एक व्यक्ति ऐसा भी है जो पढ़ा-लिखा नहीं है और हमेशा अंगूठा लगाता है। लेकिन दरोगा ने सरकारी दस्तावेजों में उसके नाम के आगे बकायदा हस्ताक्षर दर्शा दिए हैं। वादी ने इसे गंभीर पुलिसिया अनियमितता बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
8 एकड़ पैतृक जमीन के फर्जीवाड़े का है विवाद-
प्रेसवार्ता में वादी ने बताया कि उनके पट्टीदार सच्चिदानन्द तिवारी, रणजीत तिवारी और राजीव तिवारी आदि ने कथित रूप से जालसाजी कर उनकी पैतृक भूमि अपने नाम दर्ज करा ली। विवादित जमीन ग्राम बसवार में करीब 4 एकड़ 11 डिसमिल और जनपद कुशीनगर के थाना अहिरौली क्षेत्र के ग्राम मंगलपुर में करीब 4 एकड़ है। इस कुल 8 एकड़ 11 डिसमिल जमीन के फर्जी नामांतरण के कारण वादी का परिवार भूमिहीन होने की कगार पर पहुंच गया है।
सालभर की दौड़भाग के बाद कोर्ट से दर्ज हुआ था मुकदमा-
पीड़ित के अनुसार, उन्होंने मामले को लेकर करीब एक वर्ष तक आईजीआरएस के माध्यम से मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर पुलिस के उच्चाधिकारियों तक चक्कर काटे। जब पुलिस स्तर से कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्होंने न्यायालय की शरण ली। अदालत के आदेश के बाद ही श्यामदेउरवा थाने में नामजद आरोपियों के खिलाफ जालसाजी और फ्रॉड की धाराओं में मुकदमा दर्ज हो सका था।जांच के बिना ही लगा दी अंतिम रिपोर्ट (FR)श्यामनारायण का आरोप है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद विवेचक ने साक्ष्यों की समुचित जांच करने के बजाय विपक्षी दल के प्रभाव में आकर आनन-फानन में केस में अंतिम रिपोर्ट (FR) लगा दी और मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया। अंतिम रिपोर्ट की जानकारी मिलने के बाद अब वादी ने पुनः पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को प्रार्थना पत्र भेजकर केस की विवेचना किसी अन्य निष्पक्ष अधिकारी से कराने तथा दोषी दरोगा व अन्य के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।गोरखपुर* श्यामदेउरवा थाने में दर्ज जालसाजी और फ्रॉड के एक मुकदमे की विवेचना को लेकर वादी श्याम नारायण तिवारी ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गुरुवार को गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि मुकदमे के विवेचक उप-निरीक्षक (दरोगा) आलोक कुमार राय ने अभियुक्तों से मिलीभगत कर जांच को पूरी तरह प्रभावित किया। आरोप है कि विवेचक ने केस को कमजोर करने के लिए ऐसे पांच लोगों को सरकारी गवाह बना दिया, जिन्होंने कभी गवाही दी ही नहीं।वादी के मुताबिक, इन पांचों कथित गवाहों ने अब नोटरी शपथपत्र देकर स्पष्ट किया है कि उन्होंने मुकदमे में कोई बयान नहीं दिया है और विवेचना डायरी में दर्शाए गए हस्ताक्षर उनके नहीं हैं।
अंगूठा लगाने वाले के करा दिए हस्ताक्षर-
श्याम नारायण तिवारी ने बताया कि यह पूरा मामला मुकदमा संख्या 165/2026 की विवेचना से जुड़ा है। उन्होंने पुलिसिया कार्रवाई पर तंज कसते हुए कहा कि कथित गवाहों में एक व्यक्ति ऐसा भी है जो पढ़ा-लिखा नहीं है और हमेशा अंगूठा लगाता है। लेकिन दरोगा ने सरकारी दस्तावेजों में उसके नाम के आगे बकायदा हस्ताक्षर दर्शा दिए हैं। वादी ने इसे गंभीर पुलिसिया अनियमितता बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
8 एकड़ पैतृक जमीन के फर्जीवाड़े का है विवाद-
प्रेसवार्ता में वादी ने बताया कि उनके पट्टीदार सच्चिदानन्द तिवारी, रणजीत तिवारी और राजीव तिवारी आदि ने कथित रूप से जालसाजी कर उनकी पैतृक भूमि अपने नाम दर्ज करा ली। विवादित जमीन ग्राम बसवार में करीब 4 एकड़ 11 डिसमिल और जनपद कुशीनगर के थाना अहिरौली क्षेत्र के ग्राम मंगलपुर में करीब 4 एकड़ है। इस कुल 8 एकड़ 11 डिसमिल जमीन के फर्जी नामांतरण के कारण वादी का परिवार भूमिहीन होने की कगार पर पहुंच गया है।
सालभर की दौड़भाग के बाद कोर्ट से दर्ज हुआ था मुकदमा-
पीड़ित के अनुसार, उन्होंने मामले को लेकर करीब एक वर्ष तक आईजीआरएस के माध्यम से मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर पुलिस के उच्चाधिकारियों तक चक्कर काटे। जब पुलिस स्तर से कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्होंने न्यायालय की शरण ली। अदालत के आदेश के बाद ही श्यामदेउरवा थाने में नामजद आरोपियों के खिलाफ जालसाजी और फ्रॉड की धाराओं में मुकदमा दर्ज हो सका था।जांच के बिना ही लगा दी अंतिम रिपोर्ट (FR)श्यामनारायण का आरोप है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद विवेचक ने साक्ष्यों की समुचित जांच करने के बजाय विपक्षी दल के प्रभाव में आकर आनन-फानन में केस में अंतिम रिपोर्ट (FR) लगा दी और मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया। अंतिम रिपोर्ट की जानकारी मिलने के बाद अब वादी ने पुनः पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को प्रार्थना पत्र भेजकर केस की विवेचना किसी अन्य निष्पक्ष अधिकारी से कराने तथा दोषी दरोगा व अन्य के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
