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गोरखपुर पुलिस ने मां की ममता की सुनी पुकार, तीन घंटे में बेटे को खोज लाई उम्मीद टूटने लगी थी, तभी ‘तीसरे नेत्र’ ने दिखाई राह चौकी प्रभारी हैदर अली की टीम ने रेलवे स्टेशन से 13 वर्षीय बालक को सकुशल बरामद कर मां-बाप को सौंपा...

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गोरखपुर पुलिस ने मां की ममता की सुनी पुकार, तीन घंटे में बेटे को खोज लाई उम्मीद टूटने लगी थी, तभी ‘तीसरे नेत्र’ ने दिखाई राह चौकी प्रभारी हैदर अली की टीम ने रेलवे स्टेशन से 13 वर्षीय बालक को सकुशल बरामद कर मां-बाप को सौंपा

गोरखपुर औलाद के अचानक घर से लापता हो जाने का दर्द वही मां समझ सकती है, जिसकी आंखें अपने बच्चे की एक झलक पाने के लिए दर-दर भटकती हैं। हर गुजरता पल दिल में डर और बेचैनी बढ़ाता है। गोरखनाथ क्षेत्र में भी एक मां पर उस वक्त पहाड़ टूट पड़ा, जब उसका 13 वर्षीय बेटा नाराज होकर घर से निकला और वापस नहीं लौटा। परिवार की उम्मीद धीरे-धीरे टूटने लगी थी, लेकिन गोरखपुर पुलिस ने इस दर्द को सिर्फ एक सूचना नहीं, बल्कि एक परिवार की पीड़ा समझकर बच्चे की तलाश शुरू कर दी।

इस मानवीय अभियान में जटेपुर उत्तरी चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक हैदर अली खान ने अपनी टीम के साथ तेजी दिखाई। पुलिस ने आधुनिक तकनीक के ‘तीसरे नेत्र’ यानी सीसीटीवी कैमरों की मदद से बच्चे की गतिविधियों का सुराग तलाशना शुरू किया। पुलिस टीम लगातार फुटेज खंगालती रही और संभावित रास्तों को चिन्हित करते हुए बच्चे की तलाश में जुटी रही। करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बालक को रेलवे स्टेशन से सकुशल बरामद कर लिया गया।

बच्चे के मिलने की खबर जैसे ही परिवार तक पहुंची, मां की आंखों में चिंता की जगह खुशी के आंसू छलक पड़े। जिस मां का कलेजा कुछ घंटे पहले अपने लाल की चिंता में कांप रहा था, उसके चेहरे पर बेटे को देखकर सुकून लौट आया। पुलिस ने बालक को सकुशल उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया।

पुलिस की वर्दी में दिखी इंसानियत

इस घटना ने यह भी साबित किया कि पुलिस की जिम्मेदारी केवल कानून-व्यवस्था संभालना और अपराधियों पर कार्रवाई करना ही नहीं है, बल्कि मुसीबत में फंसे लोगों के दर्द को महसूस करना और उनके साथ खड़ा होना भी पुलिस की बड़ी जिम्मेदारी है। जिस पुलिसकर्मी ने किसी मां की तड़प को अपनी जिम्मेदारी समझकर बच्चे की तलाश में मेहनत की, उसके लिए इससे बड़ी इंसानियत क्या हो सकती है।

परिजन के मन से शायद यही दुआ निकली होगी—“फक्र है मुझे उस मां पर, जिसने ऐसी औलाद को जन्म दिया है जो दूसरे के दर्द को समझती है।” क्योंकि दूसरों के दर्द को महसूस करना और उसे दूर करने का प्रयास करना ही सच्ची इंसानियत है।

‘तीसरा नेत्र’ बना पुलिस का मजबूत हथियार

आधुनिक दौर में सीसीटीवी कैमरे पुलिस के लिए तीसरे नेत्र की भूमिका निभा रहे हैं। अपराध नियंत्रण से लेकर गुमशुदा लोगों की तलाश तक, कैमरों की मदद से पुलिस को घटनाओं की कड़ियां जोड़ने में महत्वपूर्ण सहायता मिल रही है। इस मामले में भी सीसीटीवी फुटेज ने पुलिस की तलाश को दिशा दी और महज तीन घंटे में परिवार को उनका बच्चा वापस मिल गया।

पुलिस अधीक्षक नगर निमिष पाटिल के मार्गदर्शन, क्षेत्राधिकारी गोरखनाथ रवि कुमार सिंह के पर्यवेक्षण और प्रभारी निरीक्षक गोरखनाथ विजय प्रताप सिंह के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई में चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक हैदर अली खान, कांस्टेबल रामहरख चौहान, रिजर्व कांस्टेबल उत्कर्ष सिंह और रिजर्व कांस्टेबल आकाश पाण्डेय शामिल रहे।

एक बच्चे की सकुशल वापसी ने एक परिवार को सिर्फ उसका बेटा नहीं लौटाया, बल्कि उस मां की मुस्कान और उसकी उम्मीद भी वापस कर दी।