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लाइव आप तक न्यूज़ से सम्पादक की ख़ास ख़बर
किचन में लगा महंगाई का तड़का, प्याज ने लगाया अर्धशतक तो चीनी भी 65 पार
धीरे-धीरे बिगड़ रहा आम आदमी का बजट गोरखपुर अभी हम चंदा चोरी की खबर, जेन-जी की खबर और जेन-अल्फा की खबर चटखारे लेकर सुन रहे थे। अभी हम हार्मोन के बंद होने और खुलने की खबरों में दिलचस्पी ले रहे थे। हर रोज अपराध की नई-नई खबरें तलाश रहे थे। इसी बीच इधर हमारे और आपके किचन में महंगाई ने ऐसा भूचाल ला दिया कि घर का बजट ही लड़खड़ाने लगा।
एक तरफ प्याज ने महंगाई की दौड़ में अंगड़ाई लेते हुए अर्धशतक पार कर लिया है, तो दूसरी तरफ दबे पांव चीनी ने भी ऐसा उछाल मारा कि कीमत करीब पैंसठ रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। रोजमर्रा की जरूरत की इन वस्तुओं के बढ़ते दाम ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है।
प्याज की कीमत में तेजी का असर सीधे रसोई पर दिखाई देता है। दाल हो या सब्जी, सलाद हो या फिर किसी पकवान का स्वाद—प्याज लगभग हर घर की जरूरत है। ऐसे में प्याज के दाम बढ़ने का मतलब है कि गृहिणियों को सीमित बजट में रसोई चलाने के लिए खर्च का हिसाब नए सिरे से लगाना पड़ रहा है।
इसी तरह चीनी भी ऐसी वस्तु है जिसकी खपत लगभग हर घर में होती है। सुबह की चाय से लेकर नाश्ते और मिठाई तक चीनी की जरूरत पड़ती है। कीमत में लगातार बढ़ोतरी का असर आम उपभोक्ता के साथ-साथ चाय-नाश्ते की दुकानों, मिठाई कारोबार और छोटे कारोबारियों पर भी पड़ना स्वाभाविक है।
रसोई के बजट पर सीधा असर महंगाई का सबसे बड़ा असर उन परिवारों पर पड़ता है जिनकी आमदनी सीमित है। जब खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ते हैं तो परिवार को अपने मासिक बजट में दूसरे खर्चों में कटौती करनी पड़ती है। किराना, सब्जी, दूध, तेल, दाल और अन्य जरूरी सामान के बीच अगर प्याज और चीनी जैसी सामान्य वस्तुओं के दाम भी लगातार बढ़ते रहें तो घरेलू बजट का संतुलन बिगड़ना तय है।
सबसे ज़्यादा चिंता की बात यह है कि आम आदमी को महंगाई का असर एक साथ नहीं, बल्कि धीरे-धीरे महसूस होता है। हर सप्ताह कुछ रुपये की बढ़ोतरी आखिरकार महीने के अंत में एक बड़े अतिरिक्त खर्च में बदल जाती है।
जमाखोरी और कालाबाजारी पर भी नजर जरूरी बाजार में कीमतों में तेजी के पीछे आपूर्ति, उत्पादन, मौसम, परिवहन लागत और मांग जैसे कई कारण हो सकते हैं। लेकिन यदि कहीं जमाखोरी या कालाबाजारी के कारण कृत्रिम रूप से कीमतें बढ़ाई जा रही हैं तो संबंधित विभागों को इसकी जांच कर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर प्रशासन और संबंधित विभागों की निगरानी बेहद जरूरी है, ताकि उपभोक्ताओं को अनुचित कीमतों का सामना न करना पड़े।
बड़ी खबरों के बीच छोटी रसोई की बड़ी चिंता हम अक्सर बड़ी-बड़ी राजनीतिक खबरों, अपराध की घटनाओं, जेन-जी और जेन-अल्फा से जुड़े मुद्दों तथा सोशल मीडिया की चर्चाओं में उलझे रहते हैं। लेकिन आम आदमी के लिए असली सवाल यह भी है कि महीने की तनख्वाह में घर का राशन कितने दिन चलेगा।
प्याज का अर्धशतक पार करना और चीनी का पैंसठ रुपये के करीब पहुंचना इसी चिंता की ओर इशारा करता है। आज अगर यह केवल दो वस्तुओं की कीमत बढ़ने की खबर है, तो कल यही सिलसिला अन्य आवश्यक वस्तुओं तक पहुंच सकता है।
इसलिए जरूरत है कि सरकार और प्रशासन समय रहते बाजार की स्थिति पर गंभीरता से नजर रखें। आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ जमाखोरी और कालाबाजारी पर प्रभावी कार्रवाई हो तथा उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। क्योंकि अपराध और दूसरी बड़ी खबरें अपनी जगह हैं, लेकिन आम आदमी के घर में चूल्हा जलाने के लिए जरूरी सामान महंगा होना किसी बड़ी खबर से कम नहीं है। समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो रसोई का यह भूचाल आने वाले दिनों में आम आदमी के लिए और बड़ी परेशानी खड़ी कर सकता है।
