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FPGA आधारित ‘Pseudo-Random Number Generator’ विकसित करने के लिए भारत सरकार ने दिया पेटेंट, क्रिप्टोग्राफी और सुरक्षित डिजिटल संचार में हो सकता है उपयोग
डॉ मंगलदीप संपर्क नंबर- 8285412320
गोरखपुर गोरखनाथ क्षेत्र से जुड़े और वर्तमान में बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत डॉ. मंगलदीप गुप्ता ने शोध और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने डॉ. गुप्ता और उनके शोध सहयोगी राजीव कुमार चौहान के नाम ऐसी तकनीक का पेटेंट जारी किया है, जिसका संबंध क्रिप्टोग्राफी, सुरक्षित डिजिटल संचार और हार्डवेयर आधारित साइबर सुरक्षा से है। पेटेंट प्रमाणपत्र के मुताबिक इसका पेटेंट नंबर 601195 और आवेदन संख्या 202011028849 है। आवेदन 7 जुलाई 2020 को दाखिल किया गया था, जबकि पेटेंट का अनुदान 2 सितंबर 2026 को हुआ है।
पेटेंट में आविष्कार का शीर्षक “Hardware Efficient Pseudo-Random Number Generator Using Lorenz, Chen, Lü and Pehlivan Chaotic Systems on FPGA" दर्ज है। सरल शब्दों में कहें तो डॉ. गुप्ता ने ऐसी हार्डवेयर आधारित व्यवस्था विकसित की है, जो FPGA (Field Programmable Gate Array) पर काम करते हुए ऐसे pseudo-random numbers तैयार करती है, जिनका उपयोग डिजिटल डेटा को सुरक्षित रखने वाली क्रिप्टोग्राफिक तकनीकों में किया जा सकता है।
अलग-अलग ‘Chaotic Systems’ को किया एक साथ उपयोग
इस तकनीक की खासियत यह है कि इसमें Lorenz, Chen, Lü और Pehlivan नामक चार अलग-अलग chaotic mathematical systems का इस्तेमाल किया गया है। शोध में इन प्रणालियों को एक reconfigurable hardware architecture में लागू करने पर काम किया गया है। इसका उद्देश्य कम हार्डवेयर संसाधनों में तेज और प्रभावी pseudo-random number generation हासिल करना है।
डॉ. गुप्ता के इसी शोध क्षेत्र से जुड़े प्रकाशित अध्ययन में Chen chaotic system आधारित PRNG को Verilog HDL में डिजाइन कर FPGA पर prototype किए जाने का उल्लेख है। अध्ययन में तैयार किए गए random sequences को NIST के 15 statistical tests से जांचे जाने और cryptography applications में इसकी संभावनाओं का उल्लेख किया गया है।
क्या होता है Pseudo-Random Number Generator
डिजिटल दुनिया में किसी डेटा को एन्क्रिप्ट करने, सुरक्षित संचार स्थापित करने अथवा cryptographic key तैयार करने के लिए ऐसे नंबरों की जरूरत होती है जिनका क्रम आसानी से अनुमान न लगाया जा सके। इसी काम में Pseudo-Random Number Generator (PRNG) महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
डॉ. गुप्ता के शोध का फोकस ऐसे PRNG को हार्डवेयर स्तर पर अधिक दक्ष बनाने पर रहा है। उनके शोध कार्यों में FPGA, VLSI और cryptography से संबंधित कई अध्ययन शामिल हैं। उपलब्ध अकादमिक रिकॉर्ड में उनके द्वारा PRNG, 4D-hyperchaotic systems, image encryption और cryptographic S-box जैसी तकनीकों पर किए गए शोध भी दर्ज हैं।
बैंकिंग से सुरक्षित संचार तक संभावित उपयोग-
ऐसी तकनीक का उपयोग उन प्रणालियों में किया जा सकता है, जहां मजबूत pseudo-random sequences की जरूरत होती है। शोध प्रकाशन में PRNG के संभावित अनुप्रयोगों में क्रिप्टोग्राफी, बैंकिंग ट्रांजेक्शन और सुरक्षित संचार जैसे क्षेत्र शामिल बताए गए हैं।
डॉ. गुप्ता और राजीव कुमार चौहान का शोध कार्य इससे पहले भी हार्डवेयर आधारित PRNG और सुरक्षित image encryption के क्षेत्र में प्रकाशित हो चुका है। उनके शोध में FPGA पर कम हार्डवेयर जटिलता, बेहतर गति और randomness हासिल करने की दिशा में तकनीकी समाधान विकसित करने पर जोर दिया गया है।
गोरखपुर से शोध की उड़ान-
इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कार्य कर रहे डॉ. मंगलदीप गुप्ता की यह उपलब्धि गोरखपुर के लिए भी गौरव का विषय है। उनका शोध क्षेत्र सीधे तौर पर VLSI, FPGA और hardware-based cryptography जैसी अत्याधुनिक तकनीकों से जुड़ा है। अकादमिक रिकॉर्ड में भी उन्हें Electronics and Communication Engineering से जुड़े शोधकर्ता के रूप में दर्ज किया गया है।
भारत सरकार से मिला यह पेटेंट वर्षों के शोध, प्रयोग और तकनीकी नवाचार को मिली औपचारिक मान्यता है। खास बात यह है कि जिस तकनीक पर डॉ. गुप्ता ने काम किया है, वह आज तेजी से बढ़ती डिजिटल दुनिया में डेटा सुरक्षा और क्रिप्टोग्राफी के लिए उपयोगी हार्डवेयर समाधान विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा सकती है।



