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लाइव आप तक न्यूज़ से सम्पादक की ख़ास ख़बर
गोरखपुर नगर निगम का अजब कारनामा जिस हाई-लिफ्ट से सुधरती हैं स्ट्रीट लाइटें, उससे निजी इमारत पर लग रही थी पुट्टी
गोरखपुर नगर निगम के संसाधनों के दुरुपयोग का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। शहर के व्यस्ततम इलाके पांडेय हाता में नगर निगम का हाई-लिफ्ट वाहन संख्या UP53LT0304 एक निजी इमारत पर पुट्टी लगवाने के काम में इस्तेमाल होता देखा गया। सरकारी वाहन के इस निजी इस्तेमाल को देखकर स्थानीय लोग और राहगीर दंग रह गए, जिसके बाद इलाके में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।
स्ट्रीट लाइट सुधारने वाली गाड़ी से निजी काम
आमतौर पर नगर निगम के हाई-लिफ्ट (हाइड्रोलिक लिफ्टर) वाहनों का इस्तेमाल सड़कों पर लगी स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत, ऊंचे पेड़ों की छंटाई या अन्य आवश्यक नागरिक सेवाओं के लिए किया जाता है। लेकिन पांडेय हाता क्षेत्र में आज का नजारा बिल्कुल उलट था। यहां नगर निगम का यह विशेष वाहन एक बहुमंजिला निजी इमारत के सामने खड़ा था और उसकी लिफ्ट ट्रॉली पर खड़े मजदूर इमारत की बाहरी दीवारों पर पुट्टी लगा रहे थे। इस दृश्य को देखकर स्थानीय लोगों ने तंज कसते हुए कहना शुरू कर दिया कि शायद अब नगर निगम ने निजी मकानों और दुकानों की रंगाई-पुताई व पुट्टी कराने की 'विशेष सेवा' भी शुरू कर दी है।
एक्ट में नहीं है ऐसा कोई प्रावधान: पूर्व उपसभापति
सरकारी मशीनरी के इस तरह खुलेआम निजी इस्तेमाल पर सवाल खड़े होने लगे हैं। मामले को लेकर नगर निगम के पूर्व उपसभापति ज़ियाउल इस्लाम ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर निगम एक्ट या नियमावली में ऐसा कोई प्रावधान ही नहीं है, जिसके तहत सार्वजनिक उपयोग के हाई-लिफ्ट वाहन को किसी निजी इमारत की पुट्टी, पेंटिंग या पॉलिश के काम के लिए किराए पर दिया जा सके। उन्होंने इसे सरकारी संसाधनों का खुला दुरुपयोग और नियमों का उल्लंघन बताया।
अधिकारियों से नहीं हो सका संपर्कक
सार्वजनिक कार्य के लिए जनता के टैक्स के पैसों से संचालित इस वाहन का निजी कार्य में इस्तेमाल किसके आदेश पर हो रहा था, यह सवाल बना हुआ है। क्या इसके लिए कोई विशेष अनुमति दी गई थी या फिर मिलीभगत से यह खेल चल रहा था? इस संबंध में जब नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क साधने की कोशिश की गई, तो उनसे संपर्क नहीं हो सका।
फिलहाल, इस घटना के बाद नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
